वाग्देवीं कुलदेवतां मम गुरून् कालत्रयज्ञानदान्
सूर्यादींश्र्च नवग्रहान् गणपतिं भक्त्या प्रणम्येश्र्वरम् ।

अनुराधा शारदा

वैदिक ज्योतिषी और टैरो कोच

अनुराधा शारदा एक प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषी और टैरो कोच हैं। उन्हें ज्योतिष के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है। अनुराधा शारदा ने नाड़ी नक्षत्र पर काम किया है तथा ICAS से पोस्ट विशारद में डिग्री प्राप्त की हैं। उन्होंने श्री ए वी सुंदरम जी से नाड़ी कोर्स भी किया
है।

वक्री ग्रहों, नक्षत्रों और पंचांग पर उनका शोध व्यापक,अविश्वसनीय और सराहनीय है। वह एक अनुभवी और एक उत्कृष्ट शिक्षिका हैं जो अपने कार्य को लेकर सदैव उत्साहित रहती हैं एवं स्टूडेंट्स को भी ज्योतिष की बारीकी सिखाने में सदैव आगे रहती हैं।
वैदिक ज्योतिष में एक विशेषज्ञ होने के अलावा, वह टैरो कोच भी हैं, जो टैरो में बुनियादी और उन्नत स्तर के दोनों कोर्स सिखाती हैं। ज्योतिष में उनके पाठ्यक्रमों में नक्षत्र, प्रश्न, पंचांग और अन्य संबंधित

नक्षत्र कैलेंडर

अपने दैनिक जीवन के साथ नक्षत्रों की ऊर्जा को सिंक्रनाइज़ करें और नक्षत्र कैलेंडर के साथ इसका अधिकतम लाभ प्राप्त करें।

परामर्श चाहते हैं? तो अभी हमें लिखें |

यह परामर्श आपको सही घटना के लिए सही समय चुनने में मदद करता है ताकि आपको सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हो सके।

और

वीडियो

हमारे ज्ञानवर्धक वीडियो देखें

उत्कृष्ट प्रतिक्रिया:

एक ज्योतिषी की योग्यता को वृहत पराशर होरा शास्त्र के प्रथम अध्याय के श्लोक नंबर 5 -8 में बताया गया है- पराशर ऋषि ने कहा विप्रवर ! आपने संसार की हित कामना से बहुत अच्छी बात पूछी है। अतः अब मैं परमब्रह्म ब्रह्म शक्ति सरस्वती देवी को एवं समस्त संसार की उत्पत्ति के कारण रूप भगवान ग्रहपति सूर्य को प्रणाम करके ज्योतिष शास्त्र को यथावत कहता हूं जैसा मैंने पूर्व काल में ब्रह्मा जी के मुखारविंद से सुना था। शांत चित्त वाले, गुरु के प्रति भक्ति भाव से युक्त, सदैव सत्य बोलने वाले, ईश्वर में विश्वास रखने वाले शिष्य को ही यह शास्त्र सिखाना चाहिए। इसी से कल्याण होता है।

दूसरों के शिष्य, नास्तिक, कुटिल विचार वाले शिष्य को इस शास्त्र का ज्ञान देने से सदैव दुख ही प्राप्त होता है।

वृहत पराशर होरा शास्त्र के तीसरे अध्याय श्लोक नंबर 7 में, ऋषि पाराशर ने कहा है कि वैदिक ज्योतिषी के लिए नक्षत्रों के विवरण और स्वभाव को जानना बहुत महत्वपूर्ण है।

वृहत पराशर होरा शास्त्र के अंतिम अध्याय में पराशर जी कहते हैं – इस शास्त्र को ईष्या, राग-द्वेष से युक्त व्यक्ति को, परनिंदा करने वाले को, जड़, दुर्विनीत (हठी और स्वयं को अधिक बुद्धिमान समझने वाले) अनजान को, जो शिष्य ना हो, जिसका कोई पुत्र ना हो, उसे नहीं देना चाहिए।

इसके विपरीत सुशिल, भक्त, सत्यवादी, बुद्धिमान, विनीत, कुलीन व्यक्ति को इस शास्त्र का ज्ञान देना चाहिए। यह ज्योतिष पुण्य कारक,अग्रगण्य वेदांग रूप है।

अतः सच्ची भावना से इसे पढ़ना चाहिए।

जो व्यक्ति काल विभाग जानता है, ग्रहों नक्षत्रों का राशियों की विशेष गति आदि को जानता है तथा समस्त होराशास्त्र को श्रद्धा और विनय से पढ़ चुका हो, गुरु मुख से जिसने अध्ययन किया हो, बुद्धिमान हो, समस्त होरा शास्त्र के रहस्य को जानता हो, सत्यवचन व जितेन्द्रिय हो, वही शुभाशुभ फल कहने में समर्थ होता है। उसी की वाणी सत्य होती है। जो लोग श्रद्धा से इस शुभ शास्त्र को पढ़ते या सुनते हैं, उनकी आयु विद्या व बल बढ़ता है।

सारावली अध्याय संख्या 2 के अनुसार, कुंडली से संबंधित विज्ञान को होरा शास्त्र कहा जाता है। होरा नियति का विश्लेषण करने में सक्षम है। एक ज्योतिषी को अप्रत्याशित परिस्थितियों के सागर को पार करने में सलाहकार के रूप में काम करने और इसके माध्यम से धन कमाने में यह शास्त्र मदद करता है।

वैदिक ज्योतिषी के लिए, निम्नलिखित का पालन करने की आवश्यकता है,

सुबह जल्दी उठना

  • सूर्य देव को अर्घ्य देना
  • प्रतिदिन पंचांग का पाठ करें
  • उसके विषय का अच्छा ज्ञान होना चाहिए
  • अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और मांसाहारी भोजन, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • उसे केवल सच बोलना चाहिए (लेकिन यह जानना चाहिए कि उसे कैसे प्रस्तुत करना है)
Close Menu
×

Cart